प्रस्तावना

 

भारतीय दन्त परिषद की स्थापना 12 अप्रैल, 1949 में संसद द्वारा पारित दन्त चिकित्सक अधिनियम, 1948 (1948 की धारा-16) के अंतर्गत एक सांविधिक निकाय के रुप में की गई थी। 27 अगस्त, 1992 को भारत के राष्ट्रपति द्वारा घोषित अध्यादेश के माध्यम से इसमें संशोधन किए गए थे। इस अध्यादेश के माध्यम से दन्त चिकित्सक अधिनियम, 1948 में धारा 10क,10ख,10ग जैसी नई धाराओँ को प्रस्तावित किया गया। इन धाराओं के माध्यम से दन्त चिकित्सा कॉलेजों में वृध्दि, केंद्र सरकार, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी पाठ्यक्रम में सीटों की वृध्दि और नए उच्चतर पाठ्यक्रमों की शुरुआत करने पर नियंत्रण किया गया। भारत सरकार द्वारा इस संशोधन को 1 जून, 1992 से लागू करते हुए 3 अप्रैल, 1993 को भारत सरकार के असाधारण राजपत्र के भाग-II, खंड-I में अधिसूचित किया गया।

 

परिषद को मुख्य रुप से भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग) से अनुदान द्वारा वित्तपोषित किया जाता है इसके अतिरिक्त दन्त चिकित्सक अधिनियम, 1948 की धारा 53 के अंतर्गत विभिन्न राज्य दन्त परिषदो में प्रत्येक वर्ष वसूली गई फीस का चौथा भाग, दन्त चिकित्सक अधिनियम, 1948 की धारा 15 के तहत दन्त चिकित्सा संस्थानों से निरीक्षण शुल्क और दन्त चिकित्सक अधिनियम (संशोधन), 1993 के अनुच्छेद 10क के अंतर्गत नए डेंटल कॉलेजों की स्थापना की अनुमति के लिए संगठन से मिले आवेदन शुल्क, अध्ययन के उच्चतर पाठ्यक्रमों को प्रांरभ करने और दन्त कॉलेजों में प्रवेश क्षमता में वृध्दि, परिषद की आय का एक अन्य स्त्रोत है।